KCN india News हम सच के साथ वाराणासी: काशी में मां गंगा के तट के साथ ही भगवान शिव-पार्वती के परिवार की भी प्रमुखता से मान्यता है। इसी कारण से प्रथम पूज्य गणेश जी को भी समर्पित एक घाट चौरासी प्रमुख घाटों में अपना स्थान रखता है। गंगेय-गंगा पुत्र भी कहे जानें वाले भगवान श्री गणेश की संकष्टी गणेश चतुर्थी पर नमामि गंगे नें गणेश घाट पर स्वच्छता की अलख जगाई। गणेश घाट के गंगा तट पर स्वच्छता अभियान चलाया गया। प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी महाराज की पूजा अर्चना कर सभी के लिए कल्याण, सुख-समृद्धि की कामना की। प्रकृति के संरक्षक व दिव्यज्ञान के प्रतीक भगवान गणेश की पर्यावरण संरक्षण की कामना से आरती उतारी। लोक मंगल की कामना से गणेश जी को मोदक का भोग लगाया। गणेश घाट का परिसर जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, प्रणम्य शिरसा देवम गौरी पुत्रम विनायकम एवं वक्रतुंडाय एकदंताय श्री गणेशाय धीमही जैसे भजनों से सराबोर हो गया। नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला नें कहा कि भगवान गणेश प्रकृति के संरक्षण का संदेश देते हैं। गंगा को स्वच्छ बनाना है, जिसके लिए हमें मिलकर शुरुआत करनी है। गणेश चतुर्थी के शुभ दिन हम यह संकल्प लें कि गंगा में किसी भी प्रकार की गंदगी नहीं करेंगे। गंगा निर्मलीकरण के लिए जन भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। आयोजन में प्रमुख रूप से नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला, राममूरत मिश्रा, राणा प्रताप, शिव गुप्ता, सितारा देवी, गीत देवी, छोटू आदि उपस्थित रहे ।